संक्षिप्त संस्करण (शॉर्ट):
सामान्य श्रेणी के 140 सांसद।
लेकिन UGC इक्विटी रेगुलेशंस पर संसद पूरी तरह खामोश।
न विरोध, न सवाल, न स्टैंड।
अगस्त 2024 में 45 लेटरल एंट्री पदों पर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी बोले,
सरकार को पीछे हटना पड़ा।
क्योंकि उन्होंने आवाज़ उठाई।
अब मामला सिर्फ कुछ पदों का नहीं,
पूरे विश्वविद्यालय सिस्टम का है
फैकल्टी, रिसर्च और छात्रों का भविष्य।
फिर भी 140 सांसद चुप हैं।
तो सवाल सरकार से नहीं, नेताओं से है
क्या उन्होंने अपने ही लोगों को राजनीतिक रूप से expendable मान लिया है?
याद रखिए,
गलत नीति से ज़्यादा खतरनाक होती है सही लोगों की चुप्पी।
NO TO UGC DISCRIMINATION