वैसे मैं पाखंडी बाबाओं का समर्थन नहीं करता, लेकिन पंडित जी के साथ जो भी हुआ, मेरा हृदय द्रवित हो उठा। इनके साथ ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए था।
शगुन के नियमानुसार पंडित जी को 501 रूपये देना चाहिए था। दक्षिणा हमेशा विषम संख्या में ही देना चाहिए। मान्यता है कि इससे पंडित का दिया हुआ आशीर्वाद अविभाज्य और अक्षुण्ण रहता है।
भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति ने एक पुजारी से 9 दिन पूजा कराने के बाद उसे 500 रुपये दक्षिणा देकर भगा दिया
विधायक जी यह बताएं कि 9 दिन में 500 रुपये में कौन सा गुजारा हो सकता है?
ब्राह्मण की जमीन पर हालत यही है. सबसे अधिक पुजारियों को प्रताड़ित हिन्दू ही कर रहे हैं.