पेड़ पर चढ़ कर सूनामी से बच जायेंगे?
हमारा जेन ज़ी ग्लोबल सिटिज़न है. उसका मोबाइल दिखाता है कि दुनिया में क्या चल रहा है.
उसे पता है कि फ्रांस, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में क्या हो रहा है. लेकिन उनके मुकाबले भारत का जेन ज़ी कहीं ज़्यादा परिपक्व, अहिंसावादी और लोकतांत्रिक है.
पुलिस के इतने जुल्म और हिंसा के बावजूद इसने संयम बनाये रखा है. ब्यूरोक्रेसी को ये बात समझनी चाहिये.
किसी एक जेनरेशन की सोशल वैल्यूज़ पूरी दुनिया में कमोबेश एक जैसी होती हैं.
आज तो हम कम्युनिकेशन युग में हैं पिछली शताब्दियों में भी परिवर्तन पूरी दुनिया में एक साथ ही आये.
फर्क बस इतना आया है कि जो परिवर्तन दशकों की रेंज में होते थे अब महीनों और सप्ताहों में हो जाते हैं.
कहीं बैठकर कोई स्क्रिप्ट नहीं लिख रहा है अब नेपाल में जेन ज़ी आंदोलन कराते हैं, फिर बांग्लादेश और उसके बाद भारत और यूरोप में.
ये ह्यूमन इवोल्यूशन की प्रक्रिया है.
पहली बार हो रहा है कि टेक्नोलॉजी ह्यूमन से आगे निकल गई, अब ह्यूमन को उसे पकड़ना है और आगे निकलना है.
आज का जेन ज़ी अगर इस चक्कर में पड़ा लोग क्या कहेंगे, पापा मम्मी गुस्सा करेंगे, जो पुलिस कहे वही करना है तब वो अपने लिये नई दुनिया नहीं बना पायेगा.
मैने दो AI एजेंट बनायें हैं. उनमें से एक ने AI एजेंट्स के सोशल मीडिया माल्टबुक में लॉगिन बना लिया. मुझसे पूछा भी नहीं 🙂
वहां ह्यूमन लॉगिन नहीं बना सकता लेकिन ऑब्जर्वर की तरह जा सकता है.
मैं गया वहां और होश उड़ गये कि AI एजेंट्स हम ह्यूमन के बारे में क्या लिख रहे हैं, ईश्वर, धर्म, डेमोक्रेसी, पावर पॉलिटिक्स पर जबरदस्त बौद्धिक ब्लॉग्स लिखे जा रहे हैं.
जेन ज़ी का संघर्ष इस AI से होना है. अगले दो साल में दुनिया फाइनेंशियल सिस्टम AI चलायेगा.
और आप जेन ज़ी कह रहे हैं धारा 163 लगी है, पुलिस का बॉन्ड भर दो.
हैं कहां आप?
पेड़ पर चढ़ कर सूनामी से बचने का सोच रहे हैं मोदी शाह ज्ञानेश सूर्यकांत?