.
@HansrajMeena पर्यावरण की चिंता तब तुम्हे होती है, जब अडानी या मोदी सरकार की बात आती है। बाकी समय चुप्पी।
हसदेव का कोयला किसी एक व्यक्ति की जेब के लिए नहीं निकल रहा। वह राजस्थान के थर्मल प्लांटों के लिए है, उन लाखों घरों के लिए जहां बच्चे पढ़ाई करते हैं, मरीज अस्पताल जाते हैं और किसान ट्यूबवेल चलाते हैं। बिना बिजली के जल-जंगल-जमीन सिर्फ नारा है। अडानी वहां मालिक नहीं, एमडीओ है। मालिक राजस्थान सरकार की कंपनी है।
पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन नियम के अनुसार कई गुना ज्यादा पेड़ लगाए जा रहे हैं, छोटे पेड़ों की ट्रांसलोकेशन हो रही है और माइनिंग चरणबद्ध है।
ग्रेट निकोबार अडानी का प्रोजेक्ट नहीं है। यह देश की रणनीतिक जरूरत है, मलक्का स्ट्रेट के पास, चीन के समुद्री विस्तार के जवाब में।
एनजीटी ने खुद इसे रणनीतिक महत्व का बताते हुए मंजूरी दी है। पेड़ों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताना और पूरा द्वीप उजाड़ने का आरोप लगाना सच्चाई नहीं है।
आदिवासियों के नाम पर बोलते हो,लेकिन क्या चाहते हो कि आदिवासी बच्चे हमेशा अंधेरे में पढ़ें, बिजली न हो, अस्पताल दूर हो, नौकरी न हो? विकास से कुछ लोग प्रभावित होते हैं, लेकिन विकास ही उन्हें आगे ले जाता है।
अडानी ग्रुप ने देश भर में इंफ्रास्ट्रक्चर, पोर्ट, ऊर्जा और रिन्यूएबल में भारी निवेश किया है, लाखों रोजगार दिए हैं और आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल, स्वास्थ्य और आजीविका के काम किए हैं।
एक पेड़ काटने की चिंता अच्छी है। लेकिन जब वही पेड़ बैलेट पेपर के लिए कटें तो आपको कोई फर्क नहीं पड़ता। जब देश की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक ताकत के लिए कटें तो अडानी-मोदी चिल्ला ने लगते हो।
आदिवासियों का भविष्य सिर्फ जंगल बचाओ के नारे से नहीं बनेगा। बिजली, शिक्षा, सड़क, नौकरी और सम्मानजनक जीवन से बनेगा। जो विकास को सिर्फ कॉर्पोरेट लूट बताकर रोकना चाहते हैं, वे गरीबों को गरीबी में ही रखना चाहते हैं।
देश आगे बढ़ेगा। पेड़ भी लगेंगे, बिजली भी आएगी। नारेबाजी से नहीं, काम से।
ज्ञानेश कुमार जी, बैलेट पेपर के लिए पेड़ काटने की चिंता अच्छी बात है, लेकिन क्या आप हसदेव के जंगलों में लाखों पेड़ों की कटाई और ग्रेट निकोबार में लगभग 10 लाख पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के खिलाफ भी आवाज उठाएंगे?
जब आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को कॉर्पोरेट हितों के लिए उजाड़ा जाता है, तब आपकी पर्यावरण की चिंता कहां चली जाती है?
क्या आप अदाणी समूह से जुड़ी परियोजनाओं और मोदी सरकार की पर्यावरण नीतियों पर भी सवाल उठाने का साहस दिखाएंगे, या आपकी चिंता सिर्फ बैलेट पेपर तक सीमित है?
@ECISVEEP
@SpokespersonECI
@narendramodi