टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले का बिहार कनेक्शन।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में पुलिस ने 24 घंटे के अंदर तीन संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें से दो आरोपी हरियाणा के रहने वाले हैं, जबकि एक बिहार का। इसे लोग इस मामले के बिहार कनेक्शन के रूप में भी देख रहे हैं चूंकि तीन में से एक आरोपी बिहार का रहने वाला है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पूरे मामले का एक और बिहार कनेक्शन है? वह यह कि मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजतिलक रौशन, जिन्होंने इस केस को 24 घंटे के अंदर क्रैक कर दिया, वह भी मूल रूप से बिहार के ही रहने वाले हैं।
इससे पहले वह सलमान खान के घर पर हुए फायरिंग मामले में भी शुरुआती जांच का नेतृत्व कर चुके हैं, जब वह मुंबई में डीसीपी, ज़ोन - IX, के रूप में पदस्थापित थे। इसके लिए उन्होंने 15 अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया था। बाद में इस हाइ-प्रोफाइल केस को मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था।
बिहार के खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत कुल्हाड़िया गांव के निवासी राजतिलक रौशन ने अपनी उच्च शिक्षा आईआईटी खड़गपुर से पूरी की। उनका जन्म 2 फरवरी 1984 को हुआ। उनके पिता का नाम उपेन्द्र तिवारी है, जिनका वर्ष 2023 में स्वर्गवास हो चुका।
अपनी बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ समय तक उन्होंने विदेश में नौकरी भी की, लेकिन कॉरपोरेट वर्ल्ड उन्हें ज्यादा समय तक बाँधे नहीं रख सका। कॉरपोरेट नौकरी से उपजी वितृष्णा के बाद वह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बैठे और आईपीएस के लिए सिलेक्ट हुए। उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ और इस तरह 23 दिसंबर 2013 को उन्होंने एक आईपीएस अधिकारी के रूप में ज्वाइनिंग की।
वर्तमान में राज तिलक रौशन, डीसीपी (डिटेक्शन, मुंबई क्राइम ब्रांच) के रूप में पदस्थापित हैं। अभी तक की पुलिसिंग यात्रा में वह कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, वसाई-विरार, पुलिस अधीक्षक, उस्मानाबाद, डीसीपी, नागपुर, डीसीपी, जोन - IX, मुंबई पुलिस, समेत अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों पर सेवा दे चुके हैं।
2023 में सरदार वल्लभ भाई नेशनल पुलिस एकेडमी में हुए मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम में राजतिलक रौशन ने 88.25% लाकर सारे ट्रेनिंग अटेंड कर रहे आईपीएस अधिकारियों के बीच पूरे ट्रेनिंग प्रोग्राम में टॉप किया।
राज तिलक को अपने साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन के लिए जाना जाता है। वसाई विरार में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रहते हुए, उन्होंने 450 गुमशुदा बच्चों को रेस्क्यू किया। यह रेस्क्यू उस समय के मिसिंग चिल्ड्रन के सारे रिपोर्टेड केसेज का 89% था। उनके शानदार साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन के लिए उन्हें गृह मंत्रालय, भारत सरकार, की ओर से "यूनियन होम मिनिस्टर मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन" जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
साहित्यिक मन-मिजाज के इस अधिकारी के द्वारा अभी तक दो किताबें भी लिखी जा चुकी हैं। एक हिंदी में, जो "बंजारापन" शीर्षक के साथ हिंदी युग्म से प्रकाशित हुई है, जबकि दूसरा "The Bad, The Ugly & The Unknown" प्रतिष्ठित अंग्रेजी पब्लिकेशन हाउस ब्लमसबेरी से प्रकाशित हो चुका है। राज तिलक रौशन का हिंदी और अंग्रेजी भाषा पर समान पकड़ है। चूंकि वह महाराष्ट्र में पदस्थापित हैं, इसलिए मराठी भाषा पर भी शानदार पकड़ है उनका।
2015 में उस्मानाबाद के पुलिस अधीक्षक रहते हुए एक ऐसे मर्डर केस का खुलासा किया था, जो उस समय पुलिस के लिए एक बहुत बड़ी पहेली बन चुका था। कंचन परदेशी नाम की एक महिला को मारकर एक कुएं में फेंक दिया गया था। छ: महीने तक पुलिस को इस महिला के आइडेंटिटी का भी कुछ पता नहीं चल पाया। लेकिन महिला के द्वारा पहनी गई एक कुर्ती को आधार बनाकर, जो एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ऑर्डर की गई थी, साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन के माध्यम से राज तिलक के नेतृत्व में पुलिस ने केस को क्रैक कर दिया, और मृत लड़की के आरोपी बॉयफ्रेंड को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
रोहित ✍️
@RohitRuminates